महिलाएं क्यों करती हैं प्रदोष व्रत?

रजनी खेतान
इंदौर

प्रदोष व्रत भगवान शिव के कई व्रतों में से एक है जो कि बहुत फलदायक माना जाता है| इस व्रत को कोई भी स्त्री जो अपनी मनोकामना पूरी करना चाहती है, कर सकती है|

प्रदोष व्रत क्या है?
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प्रदोष व्रत का अर्थ है, सूर्यास्त के बाद तथा रात्रि का सबसे पहला पहर, जिसे सायंकाल कहा जाता है | उस सायंकाल या तीसरे पहर के समय को ही प्रदोष काल कहा जाता है |

कब होता है प्रदोष व्रत?
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“ प्रदोष व्रत प्रत्येक पक्ष (कृष्ण पक्ष व शुक्ल पक्ष) की त्रयोदशी को किया जाता है| ”

प्रदोष व्रत का महत्व
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कई जगह मान्यता व श्रध्दा के अनुसार स्त्री-पुरुष दोनों यह व्रत करते है| कहा जाता है इस व्रत से, कई दोष की मुक्ति तथा संकटों का निवारण होता है| यह व्रत साप्ताहिक महत्व भी रखता है |

वार के अनुसार प्रदोष व्रत-
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रविवार को यह भानु प्रदोष के रूप में जीवन में सुख-शांति, लंबी आयु के लिए किया जाता है|

सोमवार को यह सोम प्रदोष के रूप में किया जाता है|
इच्छा के अनुसार फल प्राप्ति तथा सकरात्मकता के लिए|

मंगलवार को भौम प्रदोष के रूप में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं व समृद्धि के लिए होता है|

बुधवार को इसे सौम्यवारा प्रदोष भी कहा जाता है।
यह शिक्षा व ज्ञान प्राप्ति के लिए किया जाता है|

गुरुवार को गुरुवारा प्रदोष से जाना जाता है।
यह पितरों से आशीर्वाद तथा शत्रु व खतरों के विनाश के लिए किया जाता है|

शुक्रवार को भ्रुगुवारा प्रदोष कहा जाता है|
धन, संपदा व सौभाग्य , जीवन में सफलता के लिए किया जाता है|

शनिवार को शनि प्रदोष कहा जाता है। यह नौकरी में पदोन्नति की प्राप्ति के लिए किया जाता है|
जिस भी वार पर यह तिथि आती है उस के अनुसार यह व्रत होता है|

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रजनी खेतान
इंदौर

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